श्रीमदभगवदगीता के तीसरे अध्याय का माहात्मय ( पोस्ट 12 ) ------ यमराज बोले - सम्पूर्ण जगत का निर्माण करने वाले परमेश्वर ! आपका अन्त:करण अत्यंत निर्मल है | आपके मुख से ही वेदों का प्रादुर्भाव हुआ है | आप ही विश्वस्वरूप और इसके विधायक ब्रह्म हैं | आपको नमस्कार है | अपने बल और वेग के कारण जो अत्यन्त दुर्धर्ष प्रतीत होते हैं, ऐसे दानवेन्द्रों का अभिमान चूर्ण करने वाले भगवान् विष्णु को नमस्कार है | पालन के समय सत्वमय शरीर धारण करने वाले, विश्व के आधारभूत, सर्वव्यापी श्रीहरि को नमस्कार है | समस्त...